Thursday, April 25, 2024
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चीनी जासूसों से भी रहना होगा सावधान

Agency : चीन न सिर्फ सीमाओं पर भारत को परेशान कर रहा है बल्कि उसने देश के भीतर आम जनता को भी टारगेट करने की वृहद योजना बना रखी है। हमे न सिर्फ चीनी कंपनियों से सर्तक रहने की जरूरत है बल्कि चीनी जासूसों के चकृव्यूह को भी तोड़ना होगा। जी हां भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने चेतावनी जारी की है चीन हैंकिंग और दूसरे तौर तरीकों से भारत की अर्थव्यवस्था पर चोट करने की फिराक में हैं वह अत्याधुनिक रक्षा प्रौद्योगिकी की चोरी करने की योजना बना रहे हैं, बल्कि दुनियाभर के बेहतरीन शिक्षकों और रिसर्चर को भर्ती करने के लिए भी पहल कर रहे हैं। इनमें विशेष रूप से अमेरिका से विशेषज्ञों की भर्ती किए जाने पर जोर दिया जा रहा है।

सूत्रों ने कहा कि उन्होंने नोटिस किया है कि चीन ने व्यापार के रहस्यों (ट्रेड सीक्रेट) तक पहुंच स्थापित करने के लिए प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अमेरिकियों की भर्ती करके अमेरिकी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की जानकारी चोरी करने का एक आक्रामक कार्यक्रम तय किया है।

अमेरिका के प्रौद्योगिकी क्षेत्र में कई भारतीय वैज्ञानिक बड़े स्तर पर काम कर रहे हैं। एक शीर्ष सूत्र ने कहा, यह भारत सरकार और सुरक्षा प्रतिष्ठानों के लिए एक गंभीर मामला है।

सूत्र ने कहा कि चीन हमेशा आर्थिक जासूसी करता है, क्योंकि वह दुनियाभर की शीर्ष कंपनियों द्वारा विकसित अनुसंधान और महंगे डिजाइन को चोरी करता है। सूत्र ने कहा कि यह अनुसंधान और डिजाइन उनके कम लागत वाले विनिर्माण क्षेत्र के अनुरूप होते हैं और यही वजह है कि वह इस आर्थिक जासूसी को अंजाम देता है।

सूत्र ने कहा, जनवरी की शुरुआत में कई कंपनियों में चीनी साइबर घुसपैठ के प्रयासों के लिए एक चेतावनी भी जारी की गई थी। इन्हीं कंपनियों में भारतीय शोधकर्ता भी काम कर रहे हैं। जासूसी का प्रयास यूएवी प्रौद्योगिकी और कुछ शीर्ष-अंत सैन्य उपकरणों के डिजाइनों को लक्षित करना था।

सूत्र ने बताया कि ऐसी तकनीकों और डिजाइन को चोरी करने के बाद चीन घरेलू स्तर पर उत्पादन करना शुरू कर देता है और फिर इन्हें सस्ती दरों पर बेचता है। सूत्र ने कहा कि इससे मूल उपकरण निर्माताओं को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।

हाल ही में अमेरिका ने चीन को वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं में चोरी करने और शिक्षा एवं प्रतिभा की आड़ में शोधकतार्ओं को अमेरिकी प्रयोगशालाओं में भेजने का आरोप लगाया है। अमेरिका ने यह भी पाया है कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) में नए भर्ती होने वाले युवा छात्र शिक्षा पाने और शोध करने के लिए दुनियाभर के विभिन्न विश्वविद्यालयों में प्रवेश कर रहे हैं।

इस साल की शुरुआत में अमेरिका ने बोस्टन विश्वविद्यालय के एक पूर्व छात्र पर चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी में लेफ्टिनेंट के रूप में स्थिति का खुलासा नहीं करने पर वीजा धोखाधड़ी का आरोप में पकड़ा था।

अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने पाया है कि उनके विश्वविद्यालय चीन के वैश्विक जासूसी युद्ध में एक आसान लक्ष्य या सॉफ्ट टारगेट बन गए हैं।

इस साल जनवरी में अमेरिकी न्याय विभाग ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय के एक प्रमुख शिक्षाविद पर एक चीनी सरकार के कार्यक्रम में उसकी कथित भूमिका को छिपाने का आरोप भी लगाया था।

News Desk
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