LUCKNOW : असद्दुदीन औवेसी, शिवपाल सिंह यादव और चन्द्रशेखर आजाद यह वह तीन नाम हैं जिन्होंने यूपी की सियासत को पिछले दिनों पैदल चलकर नांपा है। जबकि बड़े राजीनतिक दल अपने टिवटर एकाउंट और पार्टी हेडक्वार्टर में कार्यकर्ताओं के साथ मीटिंग और बैठक कर ही चलाते रहे। बिहार के नतीजे सामने है और बंगाल के चुनाव के बाद यूपी में इलेक्शन का भोपू बोल रहा होगा। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि यूपी में क्या होगा?
यूपी में योगी आदित्यनाथ की सरकार है। माफियाओं पर लगाम लगाना, सरकारी योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचाने के साथ—साथ कानून व्यवस्था और दूसरे अहम पहलुओं पर सरकार ने काम किया है। हालांकि विपक्ष ने सरकार को हर मुददे पर घेरने की कोशिश की है लेकिन उप चुनाव के नतीजों ने साफ कर दिया है कि योगी सरकार से लोगों को कोई परेशानी नहीं है।
बात अगर चुनाव की करें तो चुनाव में बहुत सी चीजों को समाने रखकर वोटर वोट देता है। युवाओं अधेड़ और बुर्जग, पुरूष और महिलाएं सभी के मुददे अलग—अलग होते हैं और सभी की पंसद अलग अलग होती है। इसके अतिरिक्त सोशल मीडिया और जात—पात भी चुनाव में महत्वपूर्ण स्थान रखती है।
बात शिवपाल सिंह यादव की करें तो यह लंबे समय से सपा में वापस जाने की सोच रहे हैं लेकिन सपा सुप्रीमो न तो साफ तौर पर मना कर रहे हैं और न ही इनका स्वागत हो रहा है। औवेसी ने देखते ही देखते पूरे यूपी में अपना कैडर तैयार कर लिया है और वह मुस्लिम युवओं की पंसद बन रहे हैं। जबकि चन्द्रशेखर का संघर्ष सभी के सामने है। दलित मान सम्मान के लिए वह जेल जा चुके है और रासुका के तहत जेल में लंबे समय तक रहे हैं।
देखना यही होगा कि यूपी की सियासत में इन लोगों का क्या फैक्टर काम करेगा।



