LUCKNOW : संतोष दुबे जिस राजनीतिक दल में गये वह सत्ता के शिखर तक पहुंची। चाहे वह बीजेपी हो या फिर शिवसेना। एक बार फिर शिवसेना की नीतियों से आजिज़ आकर संतोष दुबे ने केजरीवाल की आप पार्टी को यूपी में सिरमौर बनाने की ठानी है। संतोष दुबे आज अपनी कोर टीम के साथ यूपी प्रभारी, आप पार्टी के संजय सिंह की अगुवाई में शमिल हो रहे हैं।
बात जब संघर्ष की होगी तो संतोष दुबे का नाम सभी की जुबान पर आता है। बहैसियत समाजिक कायर्कता संतोष दुबे को कौन नहीं जनता। बिना किसी जात—पात, भेदभाव के लोगों के काम आना ही सतोष दुबे का प्रमुख शगल है।
संतोष दुबे आप पार्टी से पहले शिवसेना और बीजेपी में अहम पदों पर रह चुके हैं। उन्होंने लक्ष्मीकांत बाजपेई की अगुवाई में सपा के खिलाफ बड़ा आंदोलन छेड़ा था जिसके चलते बीजेपी ने सपा से सत्ता छीनी। उसके बाद उन्होंने शिवसेना को जवाइन किया और उसकी सरकार महाराष्ट्र में बन गयी।
सतोंष दुबे कहते हैं कि उन्होंने इन दोंनो दलो का दमान राषट्रवाद के चलते थामा था। लेकिन जब वह पार्टी के भीतर पहुंचे तो दोनों ही दलों की कथनी और करनी में भेदभाव था। और यही कारण बना इन दोनों दलों का छोड़ने का। उन्होंने कहा कि केजरीवाल लगातार अच्छा काम कर रहे हैं।
बात अगर सांसद संजय सिंह की करे तो उन्होंने यूपी मे बड़ा आंदोलन छेड़ा। यह संजय सिंह की ही हिम्मत है कि उन्होंने बाकायदा सर्वे कराकर सिद्ध किया कि योगी सरकार में ठाकुरों के अलावा सभी जाति के लोगों को नजरअंदाज किया जा रहा है।



