Policybazaar की पैरेंट कंपनी PB Fintech का शेयर 36% तक टूट गया। HDFC Life, ICICI Prudential, Max Financial समेत कई बीमा शेयर भी दबाव में आए। आखिर एक प्रस्ताव से निवेशकों में इतनी घबराहट क्यों फैल गई?
सरकार टुडे :— शेयर बाजार में कई बार किसी कंपनी का शेयर इसलिए नहीं गिरता कि आज उसकी कमाई घट गई है, बल्कि इसलिए गिरता है क्योंकि निवेशकों को लगता है कि आने वाले दिनों में उसकी कमाई पर दबाव पड़ सकता है। बीमा क्षेत्र में 24 सितंबर 2026 को ऐसा ही हुआ। भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण यानी IRDAI (IRDAI) के बीमा वितरण और कमीशन व्यवस्था में बदलाव के प्रस्ताव के बाद बीमा से जुड़े शेयरों में तेज बिकवाली शुरू हो गई। Policybazaar की मूल कंपनी PB Fintech सबसे ज्यादा प्रभावित हुई और उसका शेयर एक दिन में करीब 36% टूट गया। कंपनी के बाजार मूल्य से 31,000 करोड़ रुपये से अधिक कम हो गए।
असली डर कमीशन की कमाई का है
इसे आसान भाषा में समझिए। बीमा कंपनी अपनी पॉलिसी बेचने के लिए एजेंट, बैंक या ऑनलाइन मंच की मदद लेती है। इसके बदले इन वितरकों को कमीशन मिलता है। Policybazaar जैसे मंच के कारोबार में भी बीमा वितरण से मिलने वाली आय महत्वपूर्ण है। अब (IRDAI) ने प्रस्ताव दिया है कि अलग-अलग बीमा उत्पादों और वितरण माध्यमों पर कमीशन की सीमा तय की जाए और कई मामलों में इसे मौजूदा स्तर से काफी नीचे लाया जाए। जीवन, स्वास्थ्य और मोटर बीमा में कमीशन के ढांचे को नए सिरे से तय करने का प्रस्ताव है। कुछ मामलों में कमीशन को पॉलिसी की पूरी अवधि में बांटकर देने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।
यहीं से बाजार ने खतरा भांप लिया। अगर बीमा बेचने पर प्रति पॉलिसी मिलने वाला पैसा घटेगा, तो कंपनियों की कमाई भी प्रभावित हो सकती है। यही आशंका शेयरों में अचानक बिकवाली की बड़ी वजह बनी।
फिर बीमा कंपनियों के शेयर भी क्यों गिरे?
सवाल यह है कि अगर चोट कमीशन लेने वाले एजेंट और Policybazaar जैसे वितरकों पर है तो HDFC Life और ICICI Prudential जैसे बीमा कंपनियों के शेयर क्यों गिरे? क्योंकि बीमा कंपनियों का भी बड़ा खर्च पॉलिसी बेचने और ग्राहक तक पहुंचने में होता है। (IRDAI) के प्रस्ताव में कंपनियों के प्रबंधन खर्च और वितरण लागत को लेकर भी बदलाव सुझाए गए हैं। बाजार को चिंता हुई कि नए नियम लागू होने पर कंपनियों को ग्राहकों तक पहुंचने की रणनीति और बिक्री का ढांचा बदलना पड़ सकता है। यही वजह है कि HDFC Life और ICICI Prudential Life जैसे शेयरों में भी तेज गिरावट देखने को मिली। हालांकि सभी बीमा कंपनियों पर असर एक जैसा नहीं माना जा रहा। विश्लेषकों के अनुसार अलग-अलग कंपनियों का वितरण मॉडल और लागत ढांचा अलग है, इसलिए प्रस्ताव का प्रभाव भी अलग हो सकता है।
Policybazaar पर सबसे ज्यादा चोट क्यों?
Policybazaar की पैरेंट कंपनी PB Fintech का मामला थोड़ा अलग है। इसका कारोबार बीमा वितरण से सीधे जुड़ा है। इसलिए निवेशकों ने सबसे पहले यह हिसाब लगाया कि अगर कमीशन दरें घटती हैं तो कंपनी की प्रति पॉलिसी कमाई कितनी रह जाएगी। यही वजह है कि PB Fintech में बिकवाली बाकी कई बीमा शेयरों की तुलना में ज्यादा तेज रही। विश्लेषकों ने भी कमीशन में संभावित कमी को कंपनी की भविष्य की आय के लिए जोखिम बताया है।
आम आदमी के लिए क्या बदलेगा?
(IRDAI)का उद्देश्य केवल कंपनियों की कमाई पर असर डालना नहीं है। प्रस्ताव के पीछे उपभोक्ता संरक्षण, गलत तरीके से पॉलिसी बेचने पर रोक और बीमा खरीदने की प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी बनाने जैसे लक्ष्य भी हैं। ऑनलाइन बीमा बिक्री में ग्राहकों को आकर्षित करने वाली भ्रामक तरकीबों यानी ‘डार्क पैटर्न’ पर रोक और कमीशन व्यवस्था में ज्यादा पारदर्शिता का प्रस्ताव भी इसमें शामिल है। मसलन, अगर ग्राहक बैंक से लोन ले रहा है तो उसके साथ जबरन बीमा जोड़ने की व्यवस्था पर भी सख्ती का प्रस्ताव है। इससे ग्राहक को अपनी जरूरत और पसंद के अनुसार बीमा चुनने की ज्यादा स्वतंत्रता मिल सकती है।
अभी फैसला हुआ नहीं है
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि (IRDAI) का यह अभी प्रस्ताव है अंतिम नियम नहीं। नियामक ने संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे हैं और अंतिम नियम आने से पहले प्रस्ताव में बदलाव संभव है। इसलिए शेयर बाजार में हुई गिरावट को अंतिम परिणाम नहीं माना जा सकता। सीधी भाषा में पूरी कहानी यही है। (IRDAI)ने अभी कंपनियों की कमाई नहीं काटी है, लेकिन ऐसा प्रस्ताव जरूर रखा है जिससे निवेशकों को भविष्य की कमाई कम होने का डर लगा। इसी डर ने शेयरों में बिकवाली बढ़ाई और Policybazaar की पैरेंट कंपनी PB Fintech समेत बीमा क्षेत्र के कई शेयर अचानक धराशायी हो गए।



