Homeअन्य राज्यसांड़ पैदा होने का सवाल ही नहीं उठता!

सांड़ पैदा होने का सवाल ही नहीं उठता!

NEW DELHI : एनडीडीबी डेयरी सर्विसेज जोकि भारत की राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की सहायक कंपनी है ने मेक इन इंडिया तकनीक जोकि सेक्स सोर्टेड सीमेन (छंटाई किए गए शुक्राणुओं) के उपयोग से क्रांति लाने की बात कही है। सेक्स सोर्टेड सीमने से कृत्रिम गर्भाधान की मौजूदा लागत में 1,000 रुपये की कमी आएगी और यह देश में बेकार मवेशियों की समस्या को हल करने में उपयोगी साबित होगी।

छंटाई कर बनाई गई शुक्राणुओं की खुराक जनवरी 2021 से देश में व्यावसायिक उपयोग के लिए उपलब्ध होगी और किसानों की आय दोगुना करने में इसका महत्वपूर्ण योगदान होगा। स्वदेश में विकसित इस तकनीक से मवेशियों के शुक्राणुओं की छंटनी द्वारा सिर्फ मादा बछड़े के जन्म को सुनिश्चित किया जा सकता है।

यह तकनीक भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। एनडीडीबी डेयरी सर्विसेज द्वारा किए गए फील्ड ट्रायल के परिणाम वास्तविक परिस्थितियों में उत्पाद के प्रदर्शन को सुनिश्चित करते हैं।

अक्टूबर 2020 में चेन्नई के नजदीक एक फार्म मे इसी तकनीक के द्वारा मादा बछड़े का जन्म हुआ, जिसके लिए शुक्राणुओं की छंटाई अलमाधी सीमेन स्टेशन में की गई थी।

एनडीडीबी के चेयरमैन दिलीप रथ ने बताया, एनडीडीबी डेयरी सर्विसेज ने शुक्राणुओं की छंटनी कर बनाई गई खुराक की लागत को कम करने के लिए कुछ साल पहले स्वदेशी तकनीक का विकास किया, ताकि इसे देश के डेयरी किसानों के लिए किफायती बनाया जा सके।

आने वाले समय में इस तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाया जाएगा। स्वदेशी तकनीक से छंटनी कर बनाई गई शुक्राणुओं की खुराक उद्योग जगत में गुणवत्ता तथा उत्पादन के मानकों के समकक्ष पाई गई है।

News Desk
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